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गुरुवार, 16 मार्च 2023

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बुद्धि कितने प्रकार की होती है?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बुद्धि चार प्रकार की होती है?

1) इंटेलिजेंस कोशेंट (आईक्यू)

2) भावनात्मक भागफल (ईक्यू)

3)सामाजिक भागफल (एसक्यू)

4)प्रतिकूलता भागफल (AQ)

1. इंटेलिजेंस कोशेंट (आईक्यू): यह आपके समझ के स्तर का पैमाना है। गणित को हल करने, चीजों को याद करने और पाठों को याद करने के लिए आपको IQ की आवश्यकता होती है।

2. इमोशनल कोशेंट (ईक्यू): यह दूसरों के साथ शांति बनाए रखने, समय का पालन करने, जिम्मेदार होने, ईमानदार होने, सीमाओं का सम्मान करने, विनम्र, वास्तविक और विचारशील होने की आपकी क्षमता का पैमाना है।

3. सोशल कोशेंट (SQ): यह दोस्तों का एक नेटवर्क बनाने और इसे लंबे समय तक बनाए रखने की आपकी क्षमता का पैमाना है।

जिन लोगों का EQ और SQ अधिक होता है, वे उच्च IQ लेकिन निम्न EQ और SQ वाले लोगों की तुलना में जीवन में आगे बढ़ते हैं। अधिकांश स्कूल IQ के स्तर में सुधार पर पूंजी लगाते हैं जबकि EQ और SQ को नीचे खेला जाता है।

उच्च बुद्धि वाला व्यक्ति उच्च EQ और SQ वाले व्यक्ति द्वारा नियोजित किया जा सकता है, भले ही उसके पास औसत IQ हो।

आपका EQ आपके चरित्र का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि आपका SQ आपके करिश्मे का प्रतिनिधित्व करता है। उन आदतों को दें जो इन तीन क्यू को बेहतर बनाएंगी, खासकर आपके ईक्यू और एसक्यू को।

अब एक चौथा है, एक नया प्रतिमान:

4. द एडवर्सिटी कोशेंट (एक्यू): जीवन में किसी न किसी पैच से गुजरने और अपना दिमाग खोए बिना इससे बाहर आने की आपकी क्षमता का माप।

मुसीबतों का सामना करने पर, AQ यह निर्धारित करता है कि कौन हार मानेगा, कौन अपने परिवार को छोड़ेगा, और कौन आत्महत्या पर विचार करेगा।

माता-पिता कृपया अपने बच्चों को केवल शिक्षा के अलावा जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उजागर करें। उन्हें शारीरिक श्रम (दंड के रूप में काम का उपयोग कभी न करें), खेल और कला से प्यार करना चाहिए।

उनका आईक्यू, साथ ही साथ उनका ईक्यू, एसक्यू और एक्यू विकसित करें। उन्हें बहुमुखी मानव बनना चाहिए जो अपने माता-पिता से स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम हों।

अंत में, अपने बच्चों के लिए सड़क तैयार न करें। अपने बच्चों को सड़क के लिए तैयार करें।"

पढ़ने के लिए धन्यवाद

शनिवार, 25 फ़रवरी 2023

क्या कारण है कि अधिकांश भिखारियों के बाल नहीं झड़ते जबकि वे अपने बालों में न तेल लगाते हैं, न ही पौष्टिक भोजन कर पाते, जबकि धनवान और बेहतर जीवन जीने वाले पौष्टिक भोजन करते हैं, शम्पू, तेल भी लगाते हैं फिर भी उनके बाल झड़ते हैं?

प्रश्न से ज्यादा इस प्रश्न की गहराई है और प्रश्न बहुत ही सुंदर है।

जिस बच्चे की ज्यादा देखभाल होती है वो २४ महीनों तक भी चलना नहीं सीख पाता है,

लेकिन जो गरीब का बच्चा होता है।वो १० महीने का होते ही पैरों पर खड़ा होकर दौड़ने लग जाता है।कहने का सीधा सा मतलब है कि जीस चीज़ की ज्यादा देखभाल कराई जाती है उस चीज़ का ही ज्यादा नुकसान देखने को मिलता है।

सीधा सा अर्थ है मित्रों, बाल को संभालने के लिए ज्यादा केमिकल, विशेष तरह के साबुन, कई तरह के सेम्पू , स्प्रे और लोग तो कई प्रकार के जेल और।मैं नाम भी याद नहीं आ रहा है।सीरम लगाते हैं।

और वो अपने बालों को बचाने के लिए।हर तरह के वो उपाय करते हैं जहाँ तक वो पहुँच सकते हैं।और बालों में इतना ज्यादा एक्सपेरिमेंट हो जाता है कि बाल भी सोचते हैं कि बस अब तो ना रहे तो ही अच्छा है

आप अपने गमले में खड़े हुए फूल के पेड़ पर 1000 एक्सपेरिमेंट करो, 10 तरह की खाद डाल और 10 तरह के केमिकल डालो, 50 तरह की दवाइयां डालो।एक महीने के अंदर ही।पौधे का नाम निसान खत्म हो जाएगा।

विदेशी कंपनियों को तो प्रॉडक्ट बेचने का पैसा मिलता है।आपको क्या मिला?गंजापन।मैं सही बताऊँ तो मेरी उम्र 40 के उपर है और मैंने अपनी उम्र में एक या दो बार ही शैम्पू का उपयोग किया है और नहाने के लिए भी मैं सामान्य आयुर्वेदिक साबुन का उपयोग करता हूँ।मै पतंजलि के साबुन का उपयोग करता हूँ और आज तक मेरे शरीर पे एक भी बाल सफेद नहीं है और ना बालों से संबंधित कोई समस्या है।

बालों में सिर्फ सरसों या नारियल का तेल लगातार हूँ ।किसी भी प्रकार का।कोई भी विदेशी रसायन मुझे पसंद नहीं है।

हाँ, बड़ा अजीब लगेगा आपको यह सुनकर की मैं हफ्ते में एक बार पतंजलि के कपड़े धोने के साबुन से अपने सिर को धूल देता हूँ।

ऐसा करने से जो मुझे फायदा मिलता है।वह आप समझ सकते हो।मुझे बताने की जरूरत नहीं है।लेकिन हाँ, लोग ये जरूर बोलते हैं।कपड़े धोने के साबुन में कास्टिक होता है, एक केमिकल होता है, ज्यादा अधिक केमिकल होता है।अरे?आप क्या क्या खा लेते हो, क्या क्या नहीं खाते हो, कितने केमिकल खा लेते हो?सिर्फ एक कोल्ड ड्रिंक्स से ही कितने केमिकल आप यूज़ कर लेते हो वहाँ? ये सब नहीं चलता है।लेकिन जो मैं बोला सत्य बोला।और मैं किसी विशेष कंपनी का प्रचार भी नहीं करना चाहता हूँ, लेकिन मेरे पास कोई ऑप्शन नहीं था इसलिए मैंने पतंजलि का नाम लिया है।

इस लाइन से भले ही आप थोड़ा सा ज्ञान इधर उधर का फेंक सकते हो, लेकिन मैं क्षमा चाहूंगा, आप दोस्तों को मैं अपना क्लियर।अनुभव बता रहा हूँ।

अब जो बेचारा घर से लाचार हैं, बेप्रवाह है, परेशान है।सड़कों पर भीख मांग रहा है।उसे कहाँ से शैंपू और साबुन मिलेगा?वो तो जितना कोशिश करता है, सिर्फ अपना पेट भरने की कोशिश करता है, वो अपना बिलकुल भी ध्यान फालतू के विषयों मे नहीं लगाता है, सिर्फ अपने पेट की तरफ लगाता है।….

लेकिन प्लीज़।किसी गरीब की गरीबी और अमीरों के स्टेटस से।अपने विचारों को।परेशान न करे, जैसे जीवन चल रहा है, चलाते रहिये, मस्त रहिये, खाते रहिये।और फालतू के बाहर के केमिकलों से अपने आपको बचाते रहीए ।

रविवार, 22 जनवरी 2023

स्कूल प्रिंसिपल ने बहुत ही कड़े शब्दों मे जब किसान की बेटी ख़ुशी से पिछले एक साल की स्कूल फीस मांगी ,तो ख़ुशी ने कहा मैडम मे घर जाकर आज पिता जी से कह दूंगी ,

#घर जाते ही बेटी ने माँ से पूछा पिता जी कहाँ है ? तो माँ ने कहा तुम्हारे पिता जी तो रात से ही खेत मे है बेटी दौड़ती हुई खेत मे जाती है और सारी बात अपने पिता को बताती है ! ख़ुशी का पिता बेटी को गोद मे उठाकर प्यार करते हुए कहता है की इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है अपनी मैडम को कहना अगले हफ्ता सारी फीस आजाएगी,

क्या हम मेला भी जाएंगे ?? ख़ुशी पूछती है

हाँ हम मेला भी जाएंगे और पकोड़े, बर्फी भी खाएंगे ख़ुशी के पिता कहते है

ख़ुशी इस बात को सुनकर नाचने लगती है और घर आते वक्त रस्ते मे अपनी सहेलियों को बताती है की मै अपने माँ पापा के साथ मेला देखने जाउंगी,पकोड़े बर्फी भी खाउंगी ये बात सुनकर पास ही खड़ी एक बजुर्ग कहती है ,बेटा ख़ुशी मेरे लिए क्या लाओगी मेले से ??

काकी हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है मे आपके लिए नए कपडे लाऊंगी ख़ुशी कहती हुई घर दौड़ जाती है !

अगली सुबह ख़ुशी स्कूल जाकर अपनी मैडम को बताती है की मैडम इस बार हमारी फसल बहुत अच्छी हुई है ,अगले हफ्ते सब फसल बिक जाएगी और पिता जी आकर सारी फीस भर देंगें

प्रिंसिपल : चुप करो तुम, एक साल से तुम बहाने बाजी कर रही हो

ख़ुशी चुप चाप क्लास मे जाकर बैठ जाती है और मेला घूमने के सपने देखने लगती है तभी

ओले पड़ने लगते है

तेज बारिश आने लगती है बिजली कड़कने लगती है पेड़ ऐसे हिलते है मानो अभी गिर जाएंगे

ख़ुशी एकदम घबरा जाती है

ख़ुशी की आँखों मे आंसू आने लगते है वोही डर फिर सताने लगता है डर सब खत्म होने का , डर फसल बर्बाद होने का ,डर फीस ना दे पाने का ,स्कूल खत्म होने के बाद वो धीरे धीरे कांपती हुई घर की तरफ बढ़ने लगती है। हुआ भी ऐसा कि सभी फसल बर्बाद हो गई और खुशी स्कूल में फीस जमा नही करने के कारण ताना सुनने लगी।

उस छोटी सी बच्ची को मेला घुमने और बर्फी खाने का शौक मन में ही रह गया।

छोटे किसान और मजदूरों के परिवार में जो दर्द है उसे समझने में पूरी उम्र भी गुजर जाएगी तो भी शायद वास्तविक दर्द को महसूस नही कर सकते आप।।।

@everyone

भारत के आम किसान का वास्तविक दर्द यह है।

शनिवार, 10 दिसंबर 2022

अधिकतर भारतीय पैसा बचाने वाले स्वभाव के बाद भी अमीर क्यों नहीं बन पाते हैं?

बढ़िया प्रश्न है!

अधिकतर भारतीय पैसा बचाने के बाद भी अमीर क्यों नहीं बनते?

इसका सीधा सच्चा एक पंक्ति का उत्तर ये होगा की पैसा बचाने से कभी कोई अमीर नहीं बनता,अगर धनवान बनना है तो पैसे को सही तरीके से निवेश करना होगा।

आपके बैंक अकाउंट में रखा पैसा, आपके घर की तिजोरी में रखा पैसा, दाल-चावल के डब्बों में छुपाया हुआ हर एक पैसा आपका रिसोर्स है, आपका श्रमिक है। जब तक इस पैसे को बाहर काम पर नहीं भेजेंगे तब तक इस पैसे से और पैसा नहीं बना पाएंगे। कभी भी पैसे को खाली मत बैठने दो, उसे लगातार घर के बाहर काम पर लगाकर रखो यानी की निवेश करो।

हम भारतीय यही गलती करते हैं की पैसा भली प्रकार से निवेश नहीं करते।

सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये है की हमे स्कूल, कॉलेज आदि में पैसों के प्रबंधन के बारे में बिलकुल समझाया नहीं जाता। फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता) के नाम पर हमें कुछ भी सिखाया नहीं जाता।

नतीजतन, आधे से ज्यादा लोग अच्छी से अच्छी तनख्वाह पाकर भी या पैसा कमाकर भी बचा नहीं पाते। जो बचा लेते हैं उनमें से अधिकांश लोग अच्छी जगह निवेश नहीं करते।

मुझे आश्चर्य होता है जब अच्छे पढ़े लिखे लोगों से पूछो की उन्होंने कहां निवेश किया हुआ है तो उनका उत्तर होगा बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में,LIC की किसी पॉलिसी में।

अधिकांश भारतीय अपने पैसों से बैंको को कमाई कर के देते हैं।

एक कैलकुलेशन देखिए: आज की तारीख में फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दर होगी शायद 6% के आसपास। जब ब्याज आएगा तो टैक्स भी कट जायेगा। अगर 10% टैक्स वाला स्लैब भी लें तो 0.6% टैक्स में ही चला जायेगा। मतलब प्रभावी रूप से हमे मिला 5.4% का रिटर्न।

आज की तारीख में महंगाई दर का एवरेज देखें तो 7% के आसपास आ जायेगा। मतलब अगर आपके पास आज 100 रुपए हैं और आपने फिक्स्ड डिपॉजिट किए तो अगले साल टैक्स कटने के बाद वो ₹105.4 होंगे वहीं महंगाई दर अगर 7% है तो आज के ₹100 के बदले आपको ₹107 रुपए चाहिए होंगे लेकिन आपके पास तो ₹105.4 ही हैं।

तो बताइए पैसा बचाने के बाद भी आप अमीर हुए या गरीब।

ऐसा ही कुछ LIC की पॉलिसियों के साथ भी है। हम बचत, निवेश और इंश्योरेंस के कांसेप्ट की खिचड़ी बना देते हैं।

हालांकि काफी हद तक अब म्यूचुअल फंड्स के प्रति अवेयरनेस आई है। लेकिन फिर भी भारत में अभी भी 10 करोड़ के आसपास ही डीमैट अकाउंट हैं। ये दूसरे देशों के मुकाबले काफी कम है। शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट को लेकर अभी भी लोगो के मन कईं शंकाएं रहती हैं।

किसी भी चीज को बिना जानकारी के करेंगे तो नुकसान होगा ही लेकिन अगर किसी चीज को सीखकर करेंगे तो पैसा बनायेंगे।

हर एक इंसान के लिए जितना जरूरी पैसा कमाना है उतना ही जरूरी उसे सही ढंग से उपयोग करना और निवेश करना सीखना जरूरी है।

पैसा ही सबकुछ नहीं होता लेकिन आज की तारीख में पैसा बहुत कुछ ज़रूर होता है।

~ अनूप चीचाम

रविवार, 13 नवंबर 2022

ऐसी कौन सी बातें हैं जिन्हें सभी को बताने की जरूरत है?

यह एक ₹100 का नोट है, एक पहाड़ की तस्वीर के साथ, दुख की बात है कि यह उल्लेख नहीं है कि पर्वत शिखर का नाम क्या है।

यह वास्तविक तस्वीर है। यह पर्वत शिखर माउंट कंचनजंगा है, जो दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है, और आंशिक रूप से नेपाल में और आंशिक रूप से सिक्किम, भारत में स्थित है।

असली तस्वीर पेलिंग, सिक्किम से ली गई है। यह भारत के सबसे छोटे और सबसे खूबसूरत राज्यों में से एक है।

अब ऐसा क्या कहना है।

जगह - मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का अराइवल हॉल।

एक जर्मन पर्यटक ने ₹100 की मुद्रा दिखाते हुए 5-6 भारतीयों से पूछा कि यह कौन सा पर्वत शिखर है और कहाँ है। मेरे आश्चर्य के लिए उनमें से कोई भी इसका उत्तर नहीं दे सका।

हम हर दिन अपनी मुद्रा पर पर्वत शिखर की तस्वीर देखते हैं और फिर भी हमें इसकी जानकारी नहीं होती है।

इस संदेश को पढ़ने के बाद मुझे यकीन है कि अगली बार किसी के द्वारा पूछे जाने पर आप इस प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम होंगे।

यह ₹20 का नोट है और तस्वीर पोर्ट ब्लेयर के नॉर्थबे लाइट हाउस की है।

छवि स्रोत: गूगल

शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

अमेरिका इतना अमीर कैसे बना?

क्योंकि अमेरिका में सरकारी दफ्तरों में बाबू बिना चाय पानी का खर्चा लिए भी काम कर देता है।

क्योंकि उनके यहां सरकारी अस्पतालों में जाने वाले मरीजों को वहां के स्टाफ की गालियां नहीं खानी पड़ती और स्टाफ के लोग से भी जो पूछते हैं अगर उनको पता होता है, तो बता देते हैं ना कि यह कहते हैं कि "हम यहां यही करने बैठे हैं?"।

वहां के अस्पतालों के जांच उपकरण भी ज्यादातर काम करने वाले होते हैं ऐसा नहीं होता कि जो सस्ती जाते हैं वहां हो जाती हैं और महंगी जांचे बाहर लिख दी जाती हैं।

उनके यहां सरकारी दफ्तरों में भी एक आम कर्मचारी के लिए और सबसे बड़े अधिकारी के लिए एक ही टॉयलेट होता है, यह नहीं कि बड़े अधिकारी का चमचम आता रहता है और बाकियों का गंध से भरा रहता है।

क्योंकि वहां नालियों के किनारे चुना केवल तब नहीं पड़ता जब कोई नेता आने वाला हो।

क्योंकि अमेरिका के सिस्टम में ज्ञानवान नौजवान किसी कोचिंग में ₹12000 के वेतन पर नहीं पढ़ात और हल्का ज्ञान रखने वाले सरकारी स्कूलों में 50000 वेतन नहीं पाते।

उनके यहां धार्मिक सहिष्णुता दिखाने के लिए किसी खास धार्मिक वर्ग के धर्मगुरुओं को जनता की गाढ़ी कमाई से वेतन नहीं दिया जाता और उसके बाद भी धर्मनिरपेक्षता का ढिंढोरा भी कोई नहीं पीटता।

उनके यहां अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में अंग्रेजों से लड़कर हजारों कठोर यातनाएं सहने वाले किसी सावरकर को गालियां नहीं दी जाती और ना किसी लॉर्ड माउंटबेटन को आजादी के बाद भी पहला गवर्नर जनरल बनाया जाता है।

उनके यहां अगर किसी को बिजनेस करने के लिए लोन चाहिए होता है, तो उसके लिए उसे बैंक मैनेजर की जी हुजूरी नहीं करनी पड़ती।

उनके यहां उच्च पदों पर वह व्यक्ति पहुंचता है जिसके अंदर योग्यता ज्यादा होती है , ना कि वह व्यक्ति पहुंचता है जिसके पास पैसा ज्यादा होता है।

आपके पास ऐसा क्या है जिससे आप किसको भी खुश कर सकते हैं?


चीन से एक आदमी भारत आया। उसने हवाई अड्डे पर एक टैक्सी ली।

सड़क पर बस को देखकर उसने टैक्सी ड्राइवर से कहा कि भारत में बसें बहुत धीमी चलती हैं। चीन में बसें बहुत तेज चलती हैं।

कुछ पल बाद, वह एक रेलवे पुल पर आया और देखा कि पुल के ऊपर से एक ट्रेन गुजर रही है। तब चीनी आदमी ने ड्राइवर से कहा कि, यहां ट्रेनें भी बहुत धीमी चलती हैं। चीन में ट्रेनें बहुत तेज चलती हैं।

पूरी यात्रा के दौरान उसने ड्राइवर से भारत की बदनामी की शिकायत की। हालांकि, पूरी यात्रा के दौरान टैक्सी चालक चुप रहा।

चीनी आदमी जब अपने गंतव्य स्थान पर पहुंचा तो उसने ड्राइवर से पूछा मीटर रीडिंग और टैक्सी का किराया क्या है।

टैक्सी ड्राइवर ने जवाब दिया कि रु. 10,000/- है

टैक्सी का किराया सुनकर चीनियों के होश उड़ गए। वह चिल्लाया "क्या तुम मुझसे मजाक कर रहे हो? आपके देश में बसें धीमी चलती हैं, ट्रेन धीमी चलती है, सब कुछ धीमी है। एक मीटर अकेले तेज कैसे दौड़ता है? "

इस पर टैक्सी ड्राइवर ने शांतिपूर्वक जवाब दिया,

सर, *"मीटर मेड इन चाइना है"* 😜

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साभार