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रविवार, 2 अप्रैल 2023

मन पर काबू केसे किया जाए ? मन तो काफी बलवान है फिर हम उसे कंट्रोल करके अपने जरूरी कामों को केसे करें?

एक गांव में एक राजा था। जिसके पास एक घोड़ा था राजा उस घोड़े से बहुत प्यार करता था

लेकिन उस घोड़े में एक कमी थी। उसे खाने के लिए बहुत ज्यादा चाहिए होता था उससे राजा दुखी हो जाता था,

क्योंकि हर थोड़ी देर में वो घोड़ा भूखा हो जाता था। राजा ने मंत्री को बुलाया और उसे कहा यदि इस घोड़े को कंट्रोल नहीं किया गया तो ये हमारा राज्य का सारा खाना खा जायेगा और राज्य बर्बाद हो जाएगा राज्य में अकाल पड़ जाएगा राजा ने मंत्री से कहा अब इस घोड़े को तुम्हे कंट्रोल करना ही होगा यदि तुम ऐसा नहीं कर पाए तो तुम्हे मंत्री पद से हटा दिया जाएगा। मंत्री ने राजा की बात सुनी और उस घोड़े को कंट्रोल करना शुरू कर दिया। मंत्री जब भी उसे कुछ खाने को देता वो कुछ ही देर में फिर से भूखा हो जाता

और खाना न देने पर जोर जोर से चिल्लाता। ये सिलसिला एक सप्ताह तक चला लेकिन मंत्री घोड़े को कंट्रोल नहीं कर पाया। मंत्री उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया और दुखी होने लगा की अब मुझे मंत्री पद से हटा दिया जाएगा तभी उस रास्ते से एक साधु वहा पर आते है,और मंत्री से कहते हैं क्या हुआ तुम काफी परेशान लग रहे हो। तभी मंत्री पूरी बात बताते हैं तब साधु कहता है बस इतनी सी बात, मैं उस घोड़े को आसानी से काबू में कर सकता हू। चलो मुझे लेकर चलो साधु घोड़े के पास जाता है जो एक हाथ में खाना और एक हाथ में डंडा लिए होता है, पहले वो घोड़े को 2 बार खाना देता है और जब घोड़ा कुछ ही देर में फिर से तीसरी बार खाने के लिए चिल्लाता है तब उसे साधु डंडे की मार लगता है घोड़े को दर्द होता है और वह भाग जाता हैं। कुछ घंटे बाद घोड़ा फिर से खाने आता है साधु फिर से उसे 2 बार खाना देता हैं और तीसरी बार में फिर से जोरदार मार लगाता है घोड़ा फिर से डर जाता है अब घोड़ा फिर से आता हैं और 2 बार खाने के बाद वो मार पड़ने से पहले ही भाग जाता है क्योंकि घोड़े को समझ आ जाता है अब फिर से मुझे मार पड़ने वाली है और ऐसा करते करते कुछ ही महीनों में साधु उस घोड़े को पूरी तरह सुधार देता है और अब वो दिन में सिर्फ 3 बार ही खाना खाता है

दोस्तों घोड़े की उस खराब आदत के पीछे राजा का ही हाथ था। क्योंकि राजा उससे प्यार करता था और उसे थोड़ी सी भूख लग ते ही तुरंत खाना दे देता था वैसे ही राजा की जगह आप हो और उस घोड़े की जगह आपका मन आपका मन आपसे दिन भर कुछ न कुछ मांगता हैं।। की गेम खेल लो,किसी से बात कर लो, फालतू वीडियो देख लो, बाहर घूम लो या नशा कर लो। और आप मन को वह चीज तुरंत दे देते हो इस लिए उस घोड़े की तरह आपका मन बेकाबू हो चुका हैं अब आप खुद सोचो अगर यही हाल रहा तो भविष्य में आपके साथ क्या होगा? आपका घोड़ा आपके पूरे राज्य(लाइफ) को बर्बाद कर देगा और उसके जिम्मेदार सिर्फ आप होगे क्या आप जानते हो 99% लोग जन्म लेते है और सारी उम्र रोते रोते गुजर देते है और मुझे इनके दुखी रहने पर थोड़ी भी दया नही आती अब आप मेरे लिए सोचिंगे की ये व्यक्ति कितना कठोर हू, लोगो के दुख से भी इसे फर्क नहीं पड़ता तो एक बात सोचो जीवन सबको मिला है लोग अपने मन के मुताबिक आंखे बंद करके चलते हैं तो अंत में दुखी होते है, की मेरी किस्मत खबर है इनकी किस्मत नहीं इनकी आदत खराब है इन्होंने हमेशा अपने मन की बात मानी है कभी अपने घोड़े (मन) को ज्यादा खाने से नहीं रोका तो इसमें उनकी खुद की गलती हैं अब यदि अपने हर समय मन को उसकी पसंद की चीज देने पर रोक नहीं लगाई तो आप भी जीवन के अंत में उन 99% लोगो के शामिल हो जाओगे, जीवन में कुछ बड़ा करना है तो आपको 1% लोगों में शामिल होना होगा, इतिहास उठा कर देख लीजिए दुनिया वही लोग बदलते है जो खुद पर कंट्रोल करते है मन को काबू में करने के लिए अब आपको ये करना होगा कि आप घोड़े को खाना देना कम कीजिए आपको छोटे छोटे नियम बनाने होंगे अभी घोड़ा हर थोड़ी देर में खाना मांग रहा है तो आपको उसे समझना होगा कि ज्यादा खाना तेरे लिए सही नहीं है यदि वो हर 1 घंटे में 10 बार खाना मांग रहा है तो उसे केवल 8 बार ही खाना दीजिए।

उदाहरण, अगर आप दिन के 24 घंटे बर्बाद कर रहे हो तो 1 नियम बनाइए की आज से हर हाल में 1 घंटा ईमानदारी के साथ काम, पढ़ाई करूंगा जब आप 1 घंटा किसी काम को देना शुरू करोगे तो मन में आयेगा काम छोड़ मोबाइल चला, उससे बात कर, ये काम जरूरी है, वो काम जरूरी हैं,

और भी बहुत से विचार आपके दिमाग में आयेंगे उस वक़्त आपको खुद से कहना है अभी 1 घंटा तो मे अपने इस काम को देकर रहूँगा अभी तो में किसी हाल में नहीं उठने वाला, आपका मन (घोड़ा) थोड़ी देर में फिर आपसे कहेगा चल अब बाद में काम/पढ़ाई कर लेना लेकिन आप फिर से उससे बही कहना अभी नहीं 1 घंटे बाद जब आप मन को 4-5 बार मन को साफ मना कर दोगे (घोड़े की पिटाई) की नहीं अभी नहीं तो मन समझ जायगा की अब चुप रहने में ही भलाई है और वो आपके काम मे आपका साथ देना शुरू कर देगा, इस तरह आप धीरे-धीरे मन पर काबू पाना सीख जाओगे और मन (घोड़ा) अपनी बात मानना शुरू कर देगा,यदि आपको 1 घंटा भी ज्यादा लगता है तो 30 मिनट और भी ज्यादा लगता है तो 15 मिनट उस काम को कीजिए जो आपके लिए जरूरी है। और यदि मन किसी दूसरे काम को करने के लिए कहें तो उससे कहना बाद में मिलते है अभी में इस काम को करें बिना कुछ नहीं करूंगा

इसी तरह आप मन पर काबू पाना सीख जाओगे और यदि आप इसकी प्रेक्टिस हर दिन करोगे तो कुछ समय बाद आपका खुद पर इतना काबू हो जायगा कि आप दुनिया के महान लोगों में शामिल हो जाओगे, आप जिस भी समय इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं जाओ और 15 से 30 मिनट एक काम को लो और उसे पूरा करके देखो इससे आपको असली खुशी मिलेगी और आपका confidence भी बढ़ेगा कि मे कुछ कर सकता हूं यदि अपने इस पोस्ट को एकदम ध्यान से पूरा पढ़ा है तो मे दावा कर सकता हूं आप थोड़ा सा ध्यान दोगे तो अपने मन को आसानी से काबू कर लोगे क्योंकि ये पोस्ट इतनी बड़ी है, कि केवल इसे वहीं लोग ही पढ़ेंगे जिनमे ˈपेश्‌न्‍स्‌ और ध्यान की कमी नहीं है।

दोस्तों आज का यूथ गलत दिशा मे आगे बढ़ रहा है यदि आप इस पोस्ट को शेयर करेगें तो इसे पढ़कर बहुत से लोगों को सही रास्ता! और हिम्मत मिलेगी, आपके एक शेयर करने से बहुत से लोगों की मदद होगी इसीलिये इस पोस्ट को जरूर शेयर करे आपके शेयर करने में कोई पेसे नहीं लगेगें लेकिन आपके शेयर करने से किसी के जीवन मे बदलाव जरूर आएगा, इसलिए इस पोस्ट को तुरंत शेयर करें और आज के यूथ को सही मार्गदर्शन देने में मेरी मदद करे यदि इस पोस्ट से थोड़ी भी मदद हुई होगी तो लाइक जरूर करे ! मुझे बहुत खुशी मिलेगी, कि मेरी पोस्ट से आपकी कुछ मदद हो रहीं हैं और इसी तरह बेहतरीन पोस्ट हर रोज पढ़ने के लिए हमारे पेज को अभी के अभी फॉलो करें

इस पेज का मकसद आपको जीवन की सच्चाई बताना हैं!

गुरुवार, 30 मार्च 2023

नए युवाओं के लिए बेस्ट फाइनेंस टिप्स क्या है?

1. सबसे पहले जितना हो सके पैसा बचाओ।

2. 20% पैसा जरूरत की चीजों पर खर्च करो।

3. 20% पैसा बैंक में FD करो।

4. 10% पैसा गोल्ड में इन्वेस्ट करो।

5. 5% पैसा शौक की चीजों में खर्च करो।

6. 10% पैसा क्रिष्टोकारेंसी में इन्वेस्ट करो।

7. बाकी 35% शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करो।

8. हमारी फाइनेंस टिप्स कैसी लगी लाइक शेयर जरूर कीजिए।

गाँव का अनपढ़ इन्सान कैसे कमा रहा गूगल से 55 हजार महीना?

राजीव सिंह जी अपने गाँव के लिए आज प्रेरणा बन चुके हैं, गाँव में रहकर अपनी 5वीं तक की पढाई की और फिर प्राइवेट नौकरी करने लगे जहा उन्हें सामान (गोदाम) की देख रेख करनी होती थी.

राजीव जी ने अपने बेटे की सलाह पर ऑनलाइन काम को समझना शुरू किया, स्मार्टफ़ोन और तेज दिमाग होने की वजह से राजीव जी हिंदी में अपना ब्लॉग Quora पर शुरू किया और देखते देखते राजीव जी ने गूगल पर अपना ब्लॉग बना लिया और आज राजीव जी 55 हजार से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं.

ये सब इतना आसान तो नहीं था लेकिन एक महीने मेहनत करने के बाद आज राजीव जी सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं, राजीव जी ने बताया है कि उन्हें ऑनलाइन काम के बारे में बहुत पहले से पता था लेकिन सही जानकारी ना होने की वजह से उनका बहुत समय बर्बाद हुआ है.

लेकिन जब राजीव जी ने इन 25 eBooks को पढ़ा तो उन्हें सही मार्गदर्शन मिला जिससे आज वो अपने काम को सही रास्ते पर लाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.

क्या कुछ लोग जीवन की कठिन चुनौतियों के कारण अपराधी बन जाते हैं?

उत्तर प्रदेश के शहर फर्रुखाबाद में सुभाष बाथम नामक एक पुरुष ने स्थानीय जिला मजिस्ट्रेट को एक पत्र लिखा जिसमें उसने बताया कि वह एक मजदूर है। उसके घर में शौचालय की सुविधा नहीं है, उसकी बीमार माँ को खुले में शौच करना पड़ता है। वादे के बावजूद सरकार ने उसे सरकारी घर नहीं दिया।

सुभाष को एक हत्या के आरोप में कैद हुई थी और वह जमानत पर निकला था। उसे स्थानीय लोगों पर गुस्सा था क्योंकि उन्होंने उसे गिरफ्तार करवाया था। जमानत पर छूटने के बाद सुभाष ने स्थानीय लोगों से बदला लेने का षड्यंत्र बनाया।

उसने अपनी बेटी के जन्मदिन के बहाने आसपास के लोगों के बच्चों को एक पार्टी का न्योता दिया। बच्चे आए, लेकिन पार्टी नहीं हुई। सुभाष ने 20 से अधिक बच्चों को घर के अंदर बंधी बना लिया।

10 घंटे तक पुलिस सुभाष के घर को घेर कर उसके साथ बात करती रही, और इस पूरे समय 20 से अधिक बच्चे सुभाष के बंधक बने रहे। स्थानीय लोग पूरी रात जागते रहे। पुलिस ने सुभाष को सरेंडर करने के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन सफल नहीं हो पाए।

10 घंटे के बाद स्पेशल फोर्स को बुलाया गया। इतने में ही सुभाष ने घर के अंदर गोली चलाई, जिसके बाद पुलिस और इंतजार ना कर पाई। पुलिस और स्पेशल फोर्स ने घर के अंदर घुस कर सुभाष का एनकाउंटर कर दिया। खुशकिस्मती से सारे बच्चे सुरक्षित थे।

सुभाष की पत्नी ने भागने की कोशिश की तो स्थानीय लोगों ने उस पर पत्थर और ईंटों से हमला कर दिया। उसे हस्पताल लाया गया लेकिन उसकी मौत हो गई।

सुभाष को सरकार पर गुस्सा था, स्थानीय लोगों पर गुस्सा था, कानून पर भी गुस्सा था। उसने बदले की भावना से अपराध किया और ना सिर्फ खुद मरा बल्कि पत्नी को भी साथ ले गया। जिस माँ की तकलीफ की वह बात करता था, अपराध करते समय उस माँ के बारे में उसने नहीं सोचा। जो समय षड्यंत्र बनाने में लगाया, उसी में और मेहनत करता तो शायद उसका भला हो जाता। जीवन भी गंवाया और लोगों की नज़रों में राक्षस बनकर रह गया।

बुरे हालात एक व्यक्ति को शायद अच्छे पाठ पढ़ा सकते है, शायद कठोर और गुस्सैल भी बना सकते हैं, लेकिन अपराधी कभी नहीं बना सकते। अपराधी वही बनता है जिसमें अपराध करने की क्षमता हो, इसमें हालात का दोष नहीं।

मूल स्रोत: Locals beat wife of hostage-taker to death

#साथियो

बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था...

उसके पास एक बडी जालीदार टोकरी में बहुत सारे तीतर थे..!

और एक छोटी जालीदार टोकरी में सिर्फ एक ही तीतर था..!

एक ग्राहक ने पूछा

एक तीतर कितने का है..?

"40 रूपये का..!"

ग्राहक ने छोटी टोकरी के तीतर की कीमत पूछी।

तो वह बोला,

"मैं इसे बेचना ही नहीं चाहता..!"

"लेकिन आप जिद करोगे,

तो इसकी कीमत 500 रूपये होगी..!"

ग्राहक ने आश्चर्य से पूछा,

"इसकी कीमत इतनी ज़्यादा क्यों है..?"

"दरअसल यह मेरा अपना पालतू तीतर है और यह दूसरे तीतरों को जाल में फंसाने का काम करता है..!"

"जब ये चीख पुकार कर दूसरे तीतरों को बुलाता है और दूसरे तीतर बिना सोचे समझे ही एक जगह जमा हो जाते हैं फिर मैं आसानी से सभी का शिकार कर लेता हूँ..!"

बाद में, मैं इस तीतर को उसकी मनपसंद की 'खुराक" दे देता हूँ जिससे ये खुश हो जाता है..!

"बस इसीलिए इसकी कीमत भी ज्यादा है..!"

उस समझदार आदमी ने तीतर वाले को 500 रूपये देकर उस तीतर की सरे आम बाजार में गर्दन मरोड़ दी..!

किसी ने पूछा,

"अरे, ज़नाब आपने ऐसा क्यों किया..?

उसका जवाब था,

"ऐसे दगाबाज को जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं है जो अपने मुनाफे के लिए अपने ही समाज को फंसाने का काम करे और अपने लोगो को धोखा दे..!"

हमारी सामाजिक व्यवस्था में भी 500 रू की क़ीमत वाले बहुत से तीतर हैं..!

'जिन्हें सेक्युलर, लिबरल, वामपंथी, कम्युनिस्ट, धर्मनिरपेक्ष, विपक्षी, जातिवादी, परिवारवादी आदि दलों के नाम से जानते हैं. जो अपनी वर्तमान राजनीति के चक्कर में भारत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं।

धोखेबाजों से सावधान रहें..!!

ऐसे तीतर बहुत है जो बाक़ी तीतरों को को फ़सा कर उनको ईद बक़रीद और ख़ास मौको पर कटने के लिए फसा लेते है ।

इस कहानी का उपरोक्त चित्र से कोई लेना देना नहीं है।

भारतीय नोटों पर तिरछी लाइनें क्यों छपी होती हैं ? इसका मतलब जानना क्यों जरूरी है?

नोटों पर बनीं तिरक्षी लाइनों पर आपकी नजर जरूर गई होगी. खास बात है कि नोट की कीमत के हिसाब से इनकी संख्‍या घटती-बढ़ती हैं. आइए जानते हैं 100, 200, 500 और 2000 के नोटों पर बनीं इन लाइनों का क्‍या मतलब है?

: क्या कभी आपने कभी इंडियन नोटों पर बनीं तिरक्षी लाइनों पर ध्यान दिया है? अगर आपने इन लाइंस पर गौर किया होगा तो देखे होंगे कि नोट की कीमत के हिसाब से इनकी संख्‍या घटती-बढ़ती हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि इन लकीरों को नोटों पर क्‍यों बनाया गया है. दरअसल, ये लकीरें इस नोट के बारे में बड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देती है. आइए जानते हैं 100, 200, 500 और 2000 के नोटों पर बनीं इन लाइनों का क्‍या मतलब है?

क्या होते हैं ब्‍लीड मार्क्‍स

नोटों पर बनीं इन लकीरों को 'ब्‍लीड मार्क्‍स' कहते हैं. ये ब्‍लीड मार्क्‍स विशेष रूप से नेत्रहीनों के लिए बना गए हैं. नोट पर बनी इन लकीरों को छू कर वे बता सकते हैं कि यह कितने रुपए का नोट है. इसीलिए 100, 200, 500 और 2000 के नोटों पर अलग-अलग संख्‍या में लकीरें बनाई गई हैं. और इन्हीं लाइनों से नेत्रहीन इसकी कीमत भी पहचानते हैं.

नोट पर छपी लकीरें बताती हैं उसकी कीमत

आइए अब नोट की कीमत पर नजर डालते हैं. ये लकीरें नोटों की कीमत बताती हैं. 100 रुपये के नोट में दोनों तरफ चार-चार लकीरे बनी होती हैं, जिसे छू कर नेत्रहीन समझ जाते हैं कि ये 100 रुपये का नोट है. वहीं, 200 के नोट के दोनों किनारे चार-चार लकीरे हैं और सतह ही दो-दो जीरो भी लगे हैं. वहीं, 500 के नोट में 5 और 2000 के नोट में दोनों तरफ 7-7 लकीरें बनाई गई हैं. इन लकीरों की मदद से ही नेत्रहीन आसानी से इस नोट को और उसकी कीमत पहचान लेते हैं.

पक्षियों के बारे में कुछ ऐसे तथ्य क्या हैं जिनसे आप भयभीत हो जाते हैं?

१: एक गंजा गरुड की पकड़ एक वयस्क मानव की तुलना में लगभग १० गुना ज्यादा होती है। और उनके पास बड़े पंजे होते हैं, इसलिए यदि यह एक बाज चाहता तो अपने पंजे को आपकी बांह में कहीं भी डाल सकता है; यह शायद हड्डी नहीं तोड़ सकता, लेकिन आपका निश्चित रूप से खून बह जाता।

(एक सुनहरा गरुड चित्रित किया गया है, गंजा गरुड नहीं है, लेकिन वही ताक़त सभी ईगल के लिए जाते हैं।)

2: एक शुतुरमुर्ग 2,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच की ताकत से लात मार सकता है और 45 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है।

3: गिद्धों को चार मील दूर से 3 फुट के शव को देखने में सक्षम होने के लिए जाना जाता है, इसलिए यह आपको देखने से पहले ही आपको देख सकता है, और एक गिद्ध प्रजाति को 37, 000 फीट की ऊंचाई तक उड़ते हुए ट्रैक किया गया है, वाणिज्यिक एयरलाइनर इतनी ऊंचाई पर उड़ते हैं (यदि विमान बहुत ऊंचे जा रहे हैं) जहां आप ऑक्सीजन की कमी से 30 सेकंड से भी कम समय में ही मर जाएंगे।

4: एक बड़े कुत्ते के समान मैकॉ के काटने की शक्ति होती है, इसलिए अपनी उंगली न डालें।

5: ईगल्स को जीवित हिरणों और प्रोनहॉर्न की सवारी करते हुए और उन्हें जीवित खाते हुए देखा गया है, चट्टानों से बकरियों को खींचने का उल्लेख भी है (वे छोटे बच्चों को ले जाने के लिए जाने जाते हैं इसलिए सावधान रहें)।

6: अत्यधिक निराधार अफवाहें हैं कि बाज़ हिरणों को बाहर ले जाने के लिए हैरिस हॉक्स (पक्षियों का वजन 1-3 पाउंड) के पैक का उपयोग कर सकते हैं।

7: विशालकाय पेट्रेल का अस्तित्व, पक्षी जो एक अल्बाट्रॉस, एक चील और एक गिद्ध के बीच एक क्रॉस की तरह हैं, वे समुद्र में रहते हैं और अल्बाट्रॉस की तरह मछली खाते हैं, लेकिन सील के बच्चे और पेंगुइन का शिकार करते है और तट पर शवों को कहते हैं उप-अंटार्कटिक द्वीप।

स्पष्ट करने के लिए: ये तथ्य मुझे इन पक्षियों से डराते नहीं हैं, बल्कि मुझे केवल उनकी सराहना करते हैं और उनका अधिक सम्मान करते हैं।